किसान के साथ खेत में चुदाई: एक कामुक कहानी (1,043 views)
आप यह कामुक कहानी desihotstory.com पर पढ़ रहे हैं। मैं, नेहा, 24 साल की एक मॉडर्न दिल्ली की लड़की, अपनी गर्मी की छुट्टियों में गाँव के हरे-भरे खेतों की सैर करने निकली थी। मेरी टाइट क्रॉप टॉप और लो-वेस्ट जीन्स में उभरती चूचियाँ और मटकती गांड हर मर्द की नज़रों को ललचा रही थी। गाँव की ताज़ा हवा और धूप की गर्मी मेरे जिस्म में आग सी भड़का रही थी। तभी रमलाल, 32 साल का एक मज़बूत किसान, काली चमकती आँखों और पसीने से तर जिस्म के साथ मेरे सामने आया। उसकी शरारती मुस्कान और भारी आवाज़ ने मेरी चूत में सनसनी मचा दी। उस दोपहर, खेतों की सुनसानी में, रमलाल ने मुझे चोदकर मेरी हवस की प्यास बुझा दी।
उस दोपहर खेत बिल्कुल सुनसान थे। मैं एक बरगद के पेड़ की छाँव में अपनी साँसों को ठंडा कर रही थी, जब रमलाल अपने कंधे पर कुल्हाड़ी लिए मेरे पास आया। “मेमसाहब, खेतों में अकेली क्या कर रही हो?” उसने शरारत भरी नज़रों से पूछा। मैंने अपनी नज़रें उसकी मज़बूत बाहों पर टिकाईं और बोल्ड अंदाज़ में जवाब दिया, “रमलाल, मेरी चूत की आग बुझाने वाला चाहिए।” मेरी बिंदास बात सुनकर उसकी आँखें चमक उठीं। उसने कुल्हाड़ी ज़मीन पर फेंकी और मेरे करीब आकर मेरे रसीले होंठों को चूम लिया। उसका चुंबन इतना गहरा था कि मेरी साँसें थम गईं। उसकी जीभ मेरे होंठों पर नाच रही थी, और मैंने उसकी कमीज़ पकड़कर उसे और पास खींच लिया।
रमलाल ने मेरे क्रॉप टॉप को ऊपर उठाया और मेरी काली ब्रा में कैद चूचियाँ नज़र आईं। उसने ब्रा का हुक खोला, और मेरे भरे हुए, रसीले बूब्स आज़ाद हो गए। “नेहा, तेरी चूचियाँ तो अमृत से भरी हैं,” उसने कराहते हुए कहा। उसने मेरी चूचियाँ ज़ोर से दबाईं, मेरे निप्पल्स को चूसा, और हल्के से काटा। मेरी सिसकियाँ खेतों में गूंजने लगीं। मैंने अपनी जीन्स का बटन खोला, और रमलाल ने उसे नीचे खींचकर मेरी काली लेस वाली पैंटी देखी। मेरी चूत पहले से ही गीली थी, और उसने पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाया। “रमलाल, मेरी चूत को चोद दे,” मैंने सिसकते हुए कहा।
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रमलाल ने मेरी पैंटी उतारी और अपनी मोटी उंगलियाँ मेरी चूत में डालीं, धीरे-धीरे रगड़ते हुए। “तेरी चूत तो मेरे लंड के लिए तरस रही है,” उसने फुसफुसाया। मैंने कराहते हुए जवाब दिया, “रमलाल, अपने लंड से मेरी चूत को रगड़ दे।” उसने मुझे गन्ने के ढेर पर लिटाया और मेरी जांघें चौड़ी कीं। उसने अपनी धोती उतारी, और उसका 9 इंच का मोटा, सख्त लंड मेरे सामने था। उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ा, और मैं सिसकियाँ लेने लगी। फिर उसने धीरे से लंड अंदर डाला, और मेरी ज़ोरदार चीख खेतों में गूंजी।
उसका लंड मेरी चूत को पूरा भर रहा था। “रमलाल, धीरे, मेरी चूत फट जाएगी,” मैंने सिसकते हुए कहा। उसने धीरे-धीरे चुदाई शुरू की, और मेरी चूचियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं। दर्द धीरे-धीरे मज़े में बदल गया, और मेरी सिसकियाँ कामुक कराहों में तब्दील हो गईं। रमलाल ने रफ्तार बढ़ाई, और उसका लंड मेरी चूत की गहराइयों को छू रहा था। “तेरी चूत चोदने का मज़ा ही अलग है,” उसने कराहते हुए कहा। मैंने जवाब दिया, “रमलाल, मेरी चूत को और चोद, इसे तृप्त कर दे।” उसने मेरी चूचियाँ फिर से चूसीं, और मेरी चूत और गीली हो गई।
रमलाल ने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी मटकती गांड को सहलाया। “नेहा, तेरी गांड भी चोदूँगा,” उसने शरारत से कहा। मैंने सिसकते हुए जवाब दिया, “रमलाल, मेरी गांड भी ले ले, बस मेरी हवस मिटा दे।” उसने अपने लंड को मेरी गांड पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाला। मेरी चीख निकली, “धीरे, मेरी गांड फट जाएगी।” उसने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, और मेरी गांड उसके लंड को निगल रही थी। तभी रमलाल का दोस्त, विक्रम, 34 साल का, मज़बूत और शरारती, खेत में आया। उसने हमें देखा और हँसते हुए बोला, “रमलाल, मेमसाहब का मज़ा ले रहा है, मुझे भी शामिल कर।” मैंने बोल्ड अंदाज़ में कहा, “आ जा, विक्रम, मेरे मुँह में जगह है।”
रमलाल ने विक्रम को पास बुलाया, और उसने अपनी धोती उतारी। उसका मोटा लंड मेरे सामने था। उसने मेरे मुँह में लंड डाला, और मैं उसे चूसने लगी। मेरी जीभ उसके सिरे पर नाच रही थी, और उसकी सिसकियाँ तेज़ हो गईं। रमलाल मेरी गांड चोद रहा था, और मेरा जिस्म दो लंडों से भरा था। रमलाल ने मेरी चूचियाँ कसकर दबाईं, और मेरी गांड उसके लंड को निचोड़ रही थी। मैंने कराहते हुए कहा, “रमलाल, मेरी चूत में फिर से चोद।” उसने मुझे पलटा और मेरी चूत में लंड डाल दिया, ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।
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विक्रम ने मेरी गांड में अपना लंड डाला, और मेरी चीखें और तेज़ हो गईं। “विक्रम, मेरी गांड को चोद दे,” मैंने सिसकते हुए कहा। अब मेरे जिस्म में दो लंड थे—रमलाल की चूत में और विक्रम की गांड में। मेरी चूचियाँ उछल रही थीं, और मैंने दोनों को कसकर पकड़ लिया। रमलाल ने मेरे होंठों को चूमा, मेरी जीभ को चूसते हुए, और विक्रम ने मेरी चूचियाँ दबाईं। मेरा जिस्म पसीने और चुदाई की गर्मी से तर-बतर था। खेत की मिट्टी की सोंधी खुशबू और हमारी सिसकियाँ माहौल को और कामुक बना रही थीं।
रमलाल की चुदाई इतनी ज़ोरदार थी कि मेरा जिस्म थरथरा रहा था। विक्रम का लंड मेरी गांड को गहरे तक चोद रहा था, और मेरी सिसकियाँ चीखों में बदल गई थीं। “हाँ, मेरी चूत और गांड को चोदो,” मैंने चीखते हुए कहा। रमलाल ने मेरी चूत में और तेज़ी से धक्के मारे, और मेरी चूत उसके लंड को निचोड़ रही थी। “नेहा, मेरी चूत में छोड़ दूँ?” रमलाल ने पूछा। मैंने कराहते हुए कहा, “हाँ, मेरी चूत में छोड़ दे।” उसने मेरी चूत में अपनी गर्मी छोड़ दी, और विक्रम ने मेरी गांड में अपने रस बिखेरे।
दोनों ने मुझे गन्ने के ढेर पर लिटाया, और रमलाल ने मेरी चूचियाँ फिर से चूसीं। “नेहा, तेरी चूत और गांड ने हमें दीवाना कर दिया,” उसने कहा। मैंने सिसकते हुए जवाब दिया, “रमलाल, तुमने मेरी हवस तृप्त कर दी।” विक्रम ने मेरे मुँह में फिर से लंड डाला, और मैंने उसे चूसकर साफ किया। हमारी चुदाई सूरज ढलने तक चली। रमलाल और विक्रम ने बारी-बारी से मेरी चूत और गांड को चोदा, और मेरी चूचियाँ उनके दाँतों और हाथों से लाल हो गईं।
सूरज ढलने के बाद हमने कपड़े ठीक किए। मेरे जिस्म पर चुदाई के निशान थे—मेरी चूचियों पर रमलाल के दाँतों के निशान और मेरी गांड पर विक्रम के थप्पड़ों के लाल निशान। रमलाल ने मुझे एक शरारती मुस्कान दी और बोला, “नेहा, फिर खेत में आना।” मैंने हँसकर जवाब दिया, “रमलाल, मेरी चूत और गांड तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई।”
अगले दिन मैं फिर खेत गई। रमलाल अकेला था, और उसने मुझे सरसों के खेत में खींच लिया। उसने मेरी स्कर्ट ऊपर उठाई और मेरी चूत में उंगलियाँ डालीं। “नेहा, तेरी चूत अभी भी गीली है,” उसने फुसफुसाया। मैंने कराहते हुए कहा, “रमलाल, मेरी चूत को फिर चोद।” उसने मुझे सरसों के पौधों के बीच लिटाया और मेरी चूत में लंड डाल दिया। उसकी चुदाई इतनी ज़ोरदार थी कि मेरी सिसकियाँ खेत में गूंजने लगीं। उसने मेरी चूचियाँ दबाईं और मेरी चूत में फिर से अपनी गर्मी छोड़ दी।
रमलाल के साथ मेरी चुदाई का सिलसिला हर दिन चला। उसका मोटा लंड मेरी चूत और गांड को तृप्त करता था। मेरे जिस्म पर चुदाई के निशान—मेरी चूचियों पर उसके दाँतों के निशान और मेरी गांड पर उसके थप्पड़ों के लाल निशान—हमारी हवस की कहानी बयान करते थे। एक दिन विक्रम फिर से आया, और दोनों ने मिलकर मेरी चूत और गांड को चोदा। “नेहा, तू हमारी रानी है,” रमलाल ने कहा। मैंने जवाब दिया, “रमलाल, मेरी चूत और गांड तुम दोनों के लंड की गुलाम हैं।”
मेरी गाँव की छुट्टियाँ खत्म होने तक रमलाल और विक्रम ने मुझे हर खेत में चोदा। उनकी चुदाई ने मेरी हवस को नई ऊँचाइयाँ दीं। मैं दिल्ली लौटी, लेकिन मेरी चूत और गांड रमलाल के मोटे लंड की तड़प में रहती थी। मैं जानती थी कि अगली छुट्टियों में मैं फिर खेत जाऊँगी, और रमलाल का लंड मेरी चूत को फिर से तृप्त करेगा।
मैं आपको अगली कामुक कहानी जल्द ही desihotstory.com पर लिखूँगी। तब तक के लिए, मेरे प्यारे पाठकों, मेरे प्यार भरे नमस्कार!
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