विधवा सास की छुपी आग: दामाद ने रात भर चोदा, सालों की प्यास बुझाई (1,030 views)
हाय दोस्तों… मैं स्वाति हूँ। 40 साल की विधवा। तीन साल पहले मेरे पति एक दुर्घटना में चले गए। मेरी इकलौती बेटी स्वर्णा की शादी चार महीने पहले ही हो गई। उसका पति अशोक—25 साल का, कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर, लंबा-चौड़ा, गोरा, हैंडसम, मस्कुलर बॉडी वाला लड़का। स्वर्णा को पहले ट्यूशन देता था। मैं जानती थी कि वो दोनों सिर्फ पढ़ाई नहीं करते थे—गेस्ट रूम में दरवाजे की झिरी से मैंने सब देखा था। अशोक मेरी बेटी की उभरती छातियों को मसलता, स्कर्ट में हाथ डालकर चूत दबाता, और स्वर्णा उसका मोटा लंड पकड़कर मुठ मारती। मैंने सोचा—इस जवानी की आग कहीं गलत न हो जाए, इसलिए जल्दी शादी करवा दी।
शादी के बाद वो दोनों खुश थे। ज्यादातर रातें मेरे घर पर ही गुजारते। मैं जानबूझकर 9-9:30 बजे तक सो जाती, ताकि उन्हें मस्ती का मौका मिले। लेकिन असल वजह ये थी कि मैं उनकी चुदाई चुपके से देखती थी। बत्ती बंद होने के बाद सिसकारियाँ, पलंग की चरमराहट, फच-फच की आवाजें, “आह्ह… और जोर से…”—सब मेरे कानों में गूंजता। मैं बैचेन हो उठती। धीरे से उठकर दरवाजे की झिरी से झांकती। अशोक का मोटा, लंबा, नसों वाला लंड मेरी आँखों में बस गया था। उसका बलिष्ठ शरीर, खूबसूरत चेहरा… मुझे रातों में तड़पाता। मैं बिस्तर पर तड़पती, चूत दबाती, लेकिन कोई लंड नहीं था जो बुझाए।
धीरे-धीरे मैं बदल गई। अशोक के सामने ब्लाउज-पेटीकोट में घूमने लगी। लो-कट ब्लाउज से आधे बूब्स बाहर झांकते। झुकती तो वो मेरी लटकती चूचियों को घूरता, आहें भरता। मेरी गांड की गोलाई पर उसकी नजर टिक जाती। मैं जानबूझकर करता था—बिना ये सोचे कि वो मेरा दामाद है। उसकी वासना भरी नजरें मुझे और भड़कातीं। विधवा का मन किसे पता? सारी उमंगें, सारी ख्वाहिशें मन में दब जाती हैं।
एक शाम स्वर्णा ससुराल गई। मैं अकेली थी। 9 बजे घर बंद किया, ब्लू फिल्म लगाई। ब्रा-पैंटी उतार दी, सिर्फ ढीला ब्लाउज पहना। फिल्म में चुदाई के सीन—मैं बूब्स दबाती, चूत मसलती, आहें भरती। बाहर बरसात शुरू हो गई। उमस थी, पसीना छलक रहा था।
तभी स्कूटर की आवाज। दरवाजा खोला—अशोक! मैं हड़बड़ा गई। ब्लाउज आधा खुला, बूब्स झांक रहे। वो मुझे देखता रह गया।
“अशोक… इतनी रात… क्या हुआ?”
“स्वर्णा के कपड़े लेने आए… सूटकेस में हैं।”
“आओ… मैं निकाल दूँगी।”
मैं स्टूल पर चढ़ी। “अशोक, सम्हालना…”
उसने कमर थामी। उसका हाथ कूल्हों पर सरका। बिजली-सा करंट दौड़ा। मैं संतुलन बिगाड़कर गिरती—उसने मुझे फूल की तरह थाम लिया। सूटकेस गिरा, मेरा ब्लाउज ऊपर, एक बूब बाहर। हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में।
“अ…अशोक… उतार दो…”
वो झेंप गया, लेकिन उसका लंड मेरे पेट से टकरा रहा था। बाहर बरसात तेज। उसने स्वर्णा से फोन पर कहा—“माँ की तबीयत ठीक नहीं, बरसात है… रात यहीं रुकता हूँ।”
मेरा दिल धड़का। रात अकेले… क्या होगा? एक मन डर रहा था, दूसरा कह रहा था—आज हो जाने दो।
वो मेरे चूतड़ों को घूर रहा था। मैंने कहा—“क्या देख रहे हो?”
“आप… इस उम्र में भी… लड़कियों से ज्यादा… सॉरी…”
मैंने कांपते होंठों से कहा—“कहो… लड़कियों से ज्यादा क्या?”
वो मेरे ब्लाउज के बटन लगाने लगा। मेरी साँसें तेज। मैं उसकी छाती से लग गई। “अशोक… विधवा की आग कौन बुझाए? ये तन जल रहा है…”
उसने मेरे बाल खींचे, चेहरा ऊपर किया। होंठ मिले। आग भड़क उठी। उसके हाथ मेरे बूब्स दबाने लगे। ब्लाउज खुला। वो नंगा हो गया—उसका मोटा लंड तना हुआ। मैं शरमाई, लेकिन चूत तड़प उठी।
“माँ… मुझसे नहीं रहा… मेरा लंड चोदने को बेचैन है।”
मैं बिस्तर पर लेटी, पाँव खोले। वो मेरी चूत चाटने लगा—जीभ अंदर, क्लिट चूसता। मैं चीखी—“आह्ह… और गहरा… सालों बाद…” वो मेरे बूब्स मसलता रहा।
फिर मैंने उसका लंड मुंह में लिया—चूसा, चाटा, गले तक। वो सिसकारा—“हाय माँ… निकाल दोगी…” मैंने मुठ मारी, फिर मुंह में लिया। वो झड़ गया—गर्म वीर्य मुंह में। मैंने सब पी लिया।
“अब रात भर है… फिर से…”
वो फिर खड़ा हुआ। मैं उल्टी लेटी—गांड ऊपर। उसने गांड में डाला—धीरे-धीरे पूरा। दर्द + मजा। वो पीछे से पेलता रहा। मैं चीखी—“फाड़ दो गांड… जोर से!”
फिर मैं ऊपर चढ़ी—चूत में पूरा लंड। कमर घुमाई, उछली। वो नीचे से धक्के मारता। मैं 4-5 बार झड़ी। आखिर में वो ऊपर आया—जोर-जोर से पेला। हम साथ झड़े—“आह्ह… निकाल दे… मेरी चूत भर दे!”
वो मेरे ऊपर लेट गया। “माँ… आपकी जैसी सास कहाँ मिलेगी… हम छुप-छुपकर मिलेंगे।”
“हाँ मेरे लाल… मुझे अब रोज चाहिए… स्वर्णा को पता नहीं चलना चाहिए।”
बरसात थम गई, लेकिन मेरी वासना में नई बरसात शुरू हो गई। अब मैं जवान लड़की जैसी चंचल हूँ—अशोक के साथ छुपकर चुदाई का मजा लेती हूँ। माँ-बेटी का रिश्ता नहीं—ये माँ-दामाद की गुप्त आग है।
दोस्तों, ये मेरी सच्ची, गर्म और भावुक कहानी है—विधवा की तड़प, दामाद की जवानी, और सालों बाद मिली तृप्ति। कैसी लगी? कमेंट में बताओ… और हाँ, और ऐसी कहानियाँ जल्दी आएँगी! 💦🔥😈
Views: 1,030
