6, Feb 2026
विधवा भाभी की चुदाई (739 views)
हाय मेरे प्यारे दोस्तों… मैं प्रिया हूँ। 35 साल की विधवा औरत, अहमदाबाद की एक छोटी-सी सोसाइटी में रहती हूँ। बाहर से सब कुछ ठीक-ठाक लगता है—अच्छी नौकरी, प्यारी 7 साल की बेटी, बड़ा घर—लेकिन अंदर से मैं हर रात जल रही हूँ। मेरे पति को गुजरे 5 साल हो गए। वो एक कार एक्सीडेंट में चले गए थे। उसके बाद मैंने खुद को बेटी और काम में झोंक दिया, लेकिन ये बदन, ये जज्बात, ये वासना… ये सब कहीं नहीं जाते। रात को बिस्तर पर लेटती हूँ तो लगता है कोई गर्म हाथ मेरे बदन पर फिसलेगा, कोई होंठ मेरे होंठों को चूमेगा, कोई मोटा लंड मेरी चूत में धड़केगा। लेकिन हकीकत में सिर्फ अकेलापन और सिसकियाँ।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी ये आग किसी अनजान मर्द से बुझेगी। एक दिन मेरी पुरानी सहेली ने मुझे सुरेश का नंबर दिया। बोली, “प्रिया, ये लड़का विदेश से लौटा है, अच्छा बोलता है, समझदार है। बात कर ले, शायद दोस्ती हो जाए।” मैंने हँसकर फोन लगाया। पहली बात में ही उसकी आवाज में वो आत्मविश्वास था जो मुझे छू गया। वो 30 साल का था, 5'4" कद, लेकिन बातों से लगता था बहुत mature और केयरिंग। हम रोज बात करने लगे—कभी मेरी उदासी, कभी उसकी विदेश वाली जिंदगी, कभी हँसी-मजाक। धीरे-धीरे मैं उससे भावनात्मक रूप से जुड़ गई। उसकी बातें सुनकर लगता था—ये मेरी प्यास को समझ सकता है।
एक शाम मैंने हिम्मत जुटाकर उसे घर बुला लिया। बेटी को ऊपर पड़ोस वाले चिराग के घर खेलने भेज दिया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने अच्छी गुलाबी साड़ी पहनी—टाइट ब्लाउज में मेरे 38 इंच के गोरे बूब्स अच्छे से उभरे हुए। दरवाजा खुला तो वो सामने खड़ा था—गोरा, चौड़ा सीना, हल्की मुस्कान। मैंने सोचा, “काश ये मुझे चाह ले।”
बातें शुरू हुईं। मैंने कोल्ड ड्रिंक दी। जानबूझकर उसके पास बैठी, हाथ टच किया। उसकी शर्ट पर ड्रिंक गिरा—“ओह सॉरी! शर्ट उतारो, मैं साफ कर दूँगी।” वो उतारने लगा तो मेरी नजर उसके नंगे सीने पर अटक गई। मसल्स, चौड़ाई, वो गोरा रंग… मेरी चूत में झुनझुनी सी हुई। मैं शर्ट लेकर बेडरूम में गई। “सुरेश, इधर आओ… बेडरूम देखो।”
वो बेड पर बैठा। मैं बाथरूम में गई, लेकिन मन नहीं मान रहा था। वापस आई तो वो थोड़ा सुस्ता रहा था। मैंने धीरे से उसके पास जाकर हाथ उसके पैंट पर रख दिया। लंड नरम था, लेकिन मैंने सहलाना शुरू किया। वो चौंका—“ये क्या कर रही हो भाभी?”
मैंने आँखों में आँसू भरकर कहा—“सुरेश… मैं 5 साल से अकेली हूँ। कोई स्पर्श नहीं, कोई प्यार नहीं। तुम्हारी बातें सुनकर लगता है तुम समझ सकते हो। मुझे बस एक बार… संतुष्ट कर दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करूँगी, बस आज की रात मेरी।”
वो मना करने लगा—“मुझे इंटरेस्ट नहीं… मैं दोस्त तलाश रहा था।”
मैं रो पड़ी। “तो फोन क्यों किए? बातें क्यों कीं? मैंने वादा किया था अच्छी सहेलियाँ मिलवाऊँगी… लेकिन पहले मुझे बचा लो इस अकेलेपन से। तुम्हारा ये चौड़ा सीना देखकर मुझसे रहा नहीं जाता।”
मैंने उसके लंड को बाहर निकाला—4 इंच का नरम। मैंने उसे मुंह में लिया, जीभ से चाटा, चूसा, गले तक लिया। धीरे-धीरे वो खड़ा होने लगा—7 इंच, मोटा, नसों वाला, गर्म। मैं पागल हो गई। “उफ्फ… कितना मजबूत… कितना गर्म… सालों बाद ऐसा लंड महसूस कर रही हूँ।”
मैंने साड़ी उतारी। ब्लाउज खोला—मेरे बड़े-बड़े गोरे बूब्स बाहर आए, गुलाबी निप्पल्स तने हुए। पैंटी उतारी—चूत गीली, रस बह रहा था। मैंने कहा—“मुझे पता है मेरी सूरत पसंद नहीं… लेकिन आज मुझे खुश कर दो। मेरे बूब्स दबाओ, चूसो।”
वो मेरे बूब्स दबाने लगा, चूसने लगा। मैं सिसकारियाँ ले रही थी—“आह्ह… और जोर से… काटो निप्पल्स… सालों बाद कोई चूस रहा है…” मैं उसके ऊपर चढ़ गई। लंड चूत पर लगाया—टाइट थी, दर्द होने वाला था। मैंने जोर लगाया—सुपाड़ा अंदर। “आआह्ह… दर्द हो रहा है!” लेकिन मैं रुकी नहीं। 2-3 झटके—पूरा 7 इंच अंदर! मैं 5 मिनट चुप बैठी, दर्द सहती। फिर हिलना शुरू किया—धीरे-धीरे, फिर तेज। मैं ऊपर-नीचे उछल रही थी, बूब्स हिल रहे थे। “ओह्ह… गहरा… और गहरा… फाड़ दो मेरी चूत… सालों की प्यास… आआह्ह!”
वो माहिर था। मुझे मिशनरी में लिया—जोर-जोर से धक्के। फिर डॉगी—पीछे से पकड़कर गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदा। फिर cowgirl—मैं कूद रही थी। फिर spoons—साइड से गहराई तक। मैं 6-7 बार झड़ी—शरीर काँप रहा था, चीखें निकल रही थीं—“हाँ… ऐसे ही… मुझे चोदो… मुझे अपनी रंडी बना दो आज… ओह्ह फक… और तेज!”
आखिर में मैं उसके ऊपर ढेर हो गई। “सुरेश… आज के बाद सात जन्म तक चुदवाऊँ तो भी अफसोस नहीं होगा। तुम्हारी सहेलियाँ मिलवाऊँगी—ऐसी हॉट, ऐसी सेक्सी कि तुम्हारा लंड देखते ही पानी छोड़ देगा।”
वो बिना झड़े उठा, कपड़े पहने और चला गया। मैं बिस्तर पर लेटी रही—संतुष्ट, लेकिन उदास। मेरी वासना शांत हुई, लेकिन दिल में एक खालीपन आ गया।
दो दिन बाद मैंने फोन किया… क्या वो फिर आएगा? क्या मेरी आग फिर जलेगी? ये सब अगली कहानी में।
दोस्तों, ये मेरी सच्ची, भावुक और बेहद कामुक कहानी है—एक विधवा औरत की सालों की तड़प, बहकाने की हिम्मत, और आखिर में मिली वो तृप्ति जो शब्दों में बयान नहीं हो सकती। कैसी लगी मेरी कहानी? कमेंट में जरूर बताओ… और हाँ, अगर आप भी ऐसी वासना महसूस करते हो तो शेयर करो। और भी ऐसी गर्म कहानियाँ जल्दी आएँगी! 💦🔥😈

Views: 739

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *