29, Dec 2025
देसी भाभी की चुदाई: भाई की शादी में गांव वाली रिया भाभी की गांड और चूत की चुदाई (904 views)
नमस्कार दोस्तों! कैसे हैं आप सब? उम्मीद है आप सभी अपनी सेक्स लाइफ में मस्ती भरे पल बिता रहे होंगे। मेरा नाम अर्जुन है, और मैं राजस्थान के जयपुर से हूं। घर में मैं सबसे छोटा हूं – दो बड़े भाइयों का लाड़ला। आपकी तरह ही मैं भी देसी सेक्स स्टोरीज का शौकीन हूं, और आज मैं अपनी एक सच्ची घटना शेयर करने जा रहा हूं। यह देसी भाभी की चुदाई वाली कहानी 2020 की है, जब मेरी उम्र महज 20 साल की थी। यह भाई की शादी में चुदाई की आग लगी रातों की याद है, जहां मेरे मामा के बेटे विक्रम भैया की पत्नी रिया भाभी ने मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। दोस्तों, अगर आप गांव वाली भाभी चुदाई जैसी हॉट स्टोरी पढ़ने के शौकीन हैं, तो अंत तक रुकिए – इसमें टाइट चूत और कुंवारी गांड की पूरी मसालेदार डिटेल्स हैं!
उस समय मेरे बड़े भाई का रिश्ता पक्का हो चुका था, और पूरे घर में भाई की शादी में चुदाई की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। मेहमानों का तांता लग गया था – हंसी-ठिठोली, संगीत और वो राजस्थानी देसी माहौल जो दिल को छू लेता है। इंगेजमेंट के आठ दिन बाद शादी थी, तो इंगेजमेंट के बाद ज्यादातर मेहमान लौट चुके थे। लेकिन कुछ खास लोग रुके थे, जिनमें विक्रम भैया और उनकी खूबसूरत पत्नी रिया भाभी भी शामिल थे। वे शादी की बाकी रस्मों के लिए रुके हुए थे।
रिया भाभी? उफ्फ! क्या बताऊं दोस्तों, वे तो देसी भाभी की चुदाई स्टोरीज का जीता-जागता सपना लगती थीं। गांव से आईं थीं, शादी कम उम्र में हो गई थी – उनका एक बेटा 14 का और बेटी 12 की। फिर भी, उनका बदन इतना गठीला और कामुक था कि देखते ही लंड में उथल-पुथल मच जाती। हल्का सांवला रंग, लेकिन वो आंखें, वो होंठ, वो भरे-भरे स्तन जो ब्लाउज में कैद होने को तैयार न हों, और वो कमर की कटान जो साड़ी में लहराती हुई किसी को भी पागल कर दे। उनका फिगर? 36-28-38 का कुछ ऐसा ही – पर साइज से ज्यादा वो आग थी जो उनके हर नजर में झलकती। वे मुझे देखकर मुस्कुरातीं, मेरे पास आकर खाना खिलातीं, और वो स्पर्श... अरे, वो तो बस इशारा था कि गांव वाली भाभी चुदाई का मौका बस आने ही वाला है!
शादी की खुशियों के बीच रिया भाभी की नजरें मुझ पर ठहरने लगीं। मैं नोटिस करता – वो मेरी तरफ घूरतीं, कभी हाथ छू लेतीं, कभी आंखों से इशारे करतीं। एक दिन, घर के एक कमरे में कुछ औरतें इकट्ठी थीं। सब चली गईं, सिर्फ रिया भाभी और उनकी एक दोस्त बची। मैंने पहले ही उस दोस्त को अपना राज बता दिया था – वो हंसकर बाहर चली गई। मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया और पीछे से रिया भाभी को जोर से पकड़ लिया। उनका बदन मेरे हाथों में सिहर उठा। वे घबरा गईं, फुसफुसाईं – "अर्जुन, छोड़ दो! कोई देख लेगा... विक्रम भैया को पता चला तो वो मुझे जिंदा जला देंगे!"

पार्टी की रात: एक कामुक देसी चुदाई कहानी

मैंने उन्हें कसकर जकड़ा, उनके भरे-भरे दूधों को ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा। मेरा सख्त लंड उनकी साड़ी के जरिए उनकी गोल-मटोल गांड पर रगड़ खा रहा था। "भाभी, चिंता मत करो," मैंने कान में फुसफुसाया, "मैं हूं ना, कोई बाल भी बांका नहीं करेगा।" उनकी सांसें तेज हो गईं, बदन गर्म। लेकिन तभी बाहर किसी की आहट सुनाई दी – मजबूरन छोड़ना पड़ा। मैं बाहर निकल गया, लेकिन दिल में आग लग चुकी थी।
शादी संपन्न हो गई, मेहमान लौटने लगे। विक्रम भैया और रिया भाभी अभी रुके थे। अचानक विक्रम भैया ने बताया कि रिया भाभी की सास की तबीयत बिगड़ गई है – उन्हें बड़े अस्पताल ले जाना पड़ेगा। वे रिया भाभी को हमारे घर छोड़कर चले गए। अगले दिन हम दोनों ने खूब बातें कीं। उन्होंने बताया कि सास ठीक हैं, लेकिन विक्रम भैया कुछ दिनों में लौटेंगे। "तब तक मैं यहीं रुकूंगी," उन्होंने शरमाते हुए कहा। मेरी तो जान में जान आ गई – देसी भाभी की चुदाई का मौका मिल गया!
मैं मौके की ताक में था। आखिरकार वो रात आई। कमरे में नानी मां (जो नींद की गोली लेती थीं), रिया भाभी की बेटी, रिया भाभी और मैं लाइन से सोए। रात के 12 बज चुके थे। सब सो चुके थे। मैंने लाइट बंद की, अपना कंबल रिया भाभी पर डाला। वे पेटीकोट-साड़ी-ब्लाउज में थीं, मैं लोअर-टी-शर्ट में। 
मेरा लंड पहले से ही खड़ा था – उत्तेजना की लहरें दौड़ रही थीं। मैंने अपना लोअर नीचे सरकाया, लंड को हिलाया। हिम्मत जुटाई और कंबल के नीचे उनकी साड़ी-पेटीकोट ऊपर सरकाया। अरे वाह! चड्डी भी नहीं पहनी थी। वे करवट लेकर सो रही थीं – उनकी चूत का गर्माहट महसूस हो रही थी।
मैंने दोनों टांगों के बीच घुसेड़ लिया – बायां पैर ऊपर, दायां नीचे। दाएं हाथ से उनका मुंह बंद किया, बाएं हाथ में थूक लगाकर लंड चिकना किया। लंड का सुपाड़ा उनकी टाइट चूत के मुंह पर रखा। वे हिलीं-डुलीं, फुसफुसाईं – "मत करो अर्जुन... दर्द होगा!" मैंने धीरे से कहा, "भाभी, मजा आएगा... बस एक बार ट्राय तो करो।" जोश में आकर एक ही झटके में पूरा लंड अंदर! उफ्फ, कितनी टाइट चूत! दो बच्चों की मां लगती ही नहीं – वैसी ही कुंवारी सी। वे धक्का देने लगीं, लेकिन मैंने कमर पकड़ रखी। "भाभी, शशश... विक्रम भैया को कुछ नहीं बताऊंगा," मैंने वादा किया। वे ढीली पड़ गईं।
अब मैंने जोर-जोर से ठुकने शुरू किए – धक-धक! उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी, वो गर्म रस बह रही थी। "आह... उह... अर्जुन, धीरे... तेरी ताकत देखकर तो विक्रम भैया भी शर्मा जाए," वे कराह रही थीं। सात-आठ मिनट बाद मेरा वीर्य फूटने वाला था। मैंने लंड बाहर निकाला, रूमाल से साफ किया, फिर दोबारा हिलाकर खड़ा किया। रिया भाभी अभी भी वैसे ही लेटी थीं – आंखें बंद, होंठ कांपते। मैंने फिर चूत में घुसेड़ा, लेकिन अब धीमे-धीमे। वे दबी आवाज में चीखीं – "ओह... मरवा दी तूने... आह... हां... और जोर से!" तभी उन्होंने मुझे कसकर पकड़ा, होंठों पर होंठ रख दिए। उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपटी, सांसें मिलीं। "अर्जुन... मैं... मैं आ रही हूं!" और उनका चरम आ गया – चूत सिकुड़ गई, रस बह निकला। मैंने भी तेज रफ्तार पकड़ी और पूरा वीर्य उनकी चूत में उंडेल दिया। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे लेटे रहे। उनके हाथ मेरे लंड पर आए, सहलाए – फिर से सख्त हो गया।

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"भाभी, अब गांड?" मैंने पूछा। वे शरमाईं – "नहीं अर्जुन, उधर कभी नहीं... कुंवारी है। पहले चूत ही..." लेकिन मैंने मन बना लिया। हम खाली कमरे में चले गए। वहां उनकी चूत वीर्य से भरी हुई चमक रही थी। मैंने उन्हें वही पोजिशन दी – करवट पर। पैर अंदर करके गांड का उभार बाहर। उन्होंने थूक से मेरा लंड चिकना किया। "दर्द हो तो सह लेना," मैंने कहा। वे सोच रही थीं चूत में ही डालूंगा, लेकिन... एक झटके में गांड के छेद पर! सुपाड़ा घुसा, वे चीखीं – "आह! निकालो... फट गई गांड!" आंसू आ गए, मेरा लंड भी जल रहा था। थूक लगाया, धीरे-धीरे अंदर-बाहर। फिर हाथ मुंह पर रखकर पूरा झटका – अंदर! खून निकला, लेकिन अब मजा आ रहा था। वे सहयोग करने लगीं – "हां... धीरे... ओह... तेरी गांड चुदाई... मार डालेगी!" मैंने स्पीड बढ़ाई – धकापेल! सात मिनट बाद मेरा वीर्य उनकी कुंवारी गांड में छूट गया। हम थककर लेटे रहे, फिर किस करके सोने चले।
सुबह रिया भाभी को तेज बुखार चढ़ आया। मैं डॉक्टर के पास ले गया। पार्क में वे गले लगीं – "अर्जुन, मत छोड़ना मुझे..." मैंने समझाया – "भाभी, बच्चे हैं ना। कुदरत जो लिखेगी..." कुछ दिनों बाद वे चली गईं। आज तक मुलाकात नहीं हुई, लेकिन वो रातें... उफ्फ! मैं शर्मिंदा हूं, लेकिन वो आग हमेशा जिंदा रहेगी।
दोस्तों, यह देसी गांड चूत कहानी कैसी लगी? कमेंट में बताओ – ज्यादा हॉट स्टोरीज चाहिए तो सब्सक्राइब करो! अगली स्टोरी में राजस्थानी भाभी की ग्रुप चुदाई लाऊंगा। लाइक-शेयर जरूर!

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