पुलिस इंस्पेक्टर की जबरदस्ती चुदाई – एक हॉट देसी सेक्स कहानी (1,050 views)
दोस्तो, अगर आप हिंदी सेक्स स्टोरीज पढ़ने के शौकीन हैं, तो ये देसी सेक्स कहानी आपके लंड को खड़ा कर देगी। ये एक सच्ची घटना पर आधारित इंडियन सेक्स स्टोरी है, जहां एक शादीशुदा औरत की जबरदस्ती चुदाई की दास्तान है। भाभी की चुदाई से लेकर पुलिस इंस्पेक्टर के साथ हॉट सेक्स तक – सब कुछ एक्सोटिक और स्टिमुलेटिंग। पढ़िए और कमेंट्स में बताइए कि आपकी चूत या लंड पर क्या असर हुआ!

मेरी जिंदगी का इंट्रोडक्शन – एक हॉट भाभी की देसी कहानी
मेरा नाम सविता है, उम्र 32 साल। शादीशुदा भाभी हूं, जिसकी सेक्स लाइफ पहले तो बिल्कुल नॉर्मल थी। पति अमित से 6 साल पहले शादी हुई, और हम भोपाल में सेटल हो गए। अमित सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं – दिनभर ऑफिस, रात को थोड़ी सी चुदाई, बस। लेकिन मेरी बॉडी? वो तो हिंदी सेक्स स्टोरी वालों की फेवरेट है!
हाइट 5 फीट 3 इंच, गोरा रंग दूध जैसा चिकना। चेहरा कातिल – बड़ी-बड़ी आंखें, मोटे होंठ। फिगर 36-28-38 का बम! बड़े चुचे 36D साइज के, गोल-मोटे, टाइट – जैसे अभी भी कुंवारी लड़की के। मोटी गांड उभरी हुई, साड़ी में झूलती तो कोई भी घूर ले। बाल लंबे, काले, कमर तक। मैं सजना पसंद करती हूं, लेकिन छेड़खानी? नो वे! सड़क पर कमेंट्स मिलते – "क्या चुचे हैं रे!", "गांड मार दूं?", "होंठ चूस लूं भाभी?" – मैं इग्नोर करती, क्योंकि देसी सेक्स कहानी में झगड़ा मतलब टेंशन।
एक्सीडेंट और पुलिस इंस्पेक्टर का एंट्री – हवस की शुरुआत
एक शाम अमित का फोन: "सविता, एक्सीडेंट हो गया। हॉस्पिटल आओ!" दिल धक्-धक्। पहुंची तो मामूली चोटें। बाइक ने कार ठोकी। वहां पुलिस इंस्पेक्टर विक्रम सिंह – 6 फीट कद, शेर जैसी बॉडी, 35 साल का दबंग। आंखों में हवस की चमक, जैसे जबरदस्ती चुदाई प्लान कर रहा हो। बयान लिया, डिस्चार्ज करवाया, फिर बोला, "मैडम, घर ड्रॉप कर दूं। सेफ्टी फर्स्ट।" अमित ने हां कहा। रास्ते में नजरें मेरी साड़ी पर – चुचों पर, गांड पर। घर छोड़ा, लेकिन उनके स्पर्श ने मेरी चूत में सिहरन डाल दी। क्यों? शायद उनकी दबंगई ने भाभी की चूत को गुदगुदा दिया।
देसी भाभी की चुदाई: भाई की शादी में गांव वाली रिया भाभी की गांड और चूत की चुदाई
चार दिन बाद, शाम 7 बजे किचन में खाना बना रही – नीली सिल्क साड़ी, चुचे उभरे, बाल खुले। डोरबेल! विक्रम यूनिफॉर्म में, पिस्तौल कमर पर। "अमित जी से केस अपडेट।" अंदर बुलाया। चाय दी, लेकिन नजरें? मेरी मोटी गांड पर, बड़े चुचों पर। गुस्सा आया, लेकिन देसी सेक्स स्टोरी में ये तो फ्लेवर है। अमित ने खाना ऑफर किया, विक्रम ने मना: "अगली बार, मैडम। आपकी मेहमाननवाजी का शुक्रिया।" जाते-जाते घूरा – जैसे कह रहा, "तेरी चुदाई करूंगा।" रात भर चेहरा घूमा, चूत गीली हो गई सोच-सोचकर।
मार्केट में टकराव – हवस भरी नजरें और तारीफें
दो दिन बाद मार्केट – काला लहंगा, गांड हिलोरें मार रही। विक्रम दिखे। "अमित जी का हाल?" पास आए, नजरें चूत की लाइन पर। संकोच हुआ, लेकिन चौराहे पर। "ठीक हैं।" बस। वो घूरते रहे, बोले, "चाय तो जहर जैसी मीठी थी।" मुस्कुराई, लेकिन मन में तूफान – ये पुलिस वाली चुदाई की शुरुआत तो नहीं?
अगले दिन अमित ने डिनर इनवाइट किया। मैंने सोचा, टेस्ट करूंगी। तैयार हुई – लाल ट्रांसपेरेंट साड़ी, गोरी त्वचा चमक रही। ब्लाउज डीप कट, बैकलेस – क्लीवेज गहरा, तिल झांक रहा। गांड टाइट, होंठ रेड। 8 बजे डोरबेल – विक्रम, गुलदस्ता हाथ में। "आपके लिए।" हाथ छुए, करंट! अंदर, अमित से बातें। ड्रिंक मना। बैठी तो नजरें क्लीवेज में – लंड खींच रही। आंखें मिलीं, मैंने घूरा। आग लगी चूत में।
डिनर टेबल पर टचिंग – पैरों से सहलाना और धमकी
डिनर! मैं अमित-विक्रम के बीच। खाते-खाते विक्रम का पैर मेरी जांघ पर – सहला! सिहरन, लेकिन अमित व्यस्त। पैर ऊपर, चूत के पास। गुस्से से देखी, वो मुस्कुराया। हाथ छुए, मेरा हाथ उनकी जांघ पर। चूत का पानी टपका। अमित बाथरूम गया तो फुसफुसाया, "सविता, तेरी बॉडी... तड़पा रही। एक रात दे, वरना अमित का केस फिर खुलेगा।" धमकी! लेकिन चूत ने हां कहा – सिहरन से। "नहीं!" बोली, आंखें हां।
अमित के बाहर जाने के बाद – रेस्तरां में फंसना
दो दिन बाद अमित: "मुंबई जा रहा, दो दिन। स्टेशन जाते डिनर।" तैयार – हरी साड़ी, ब्लाउज टाइट। रेस्तरां में अमित जल्दी खा-खाकर गए। अकेली तो विक्रम टेबल पर – शराब की महक, आंखें लाल। "पति गए? मौका मिला।" घबराहट। "मतलब?" हंसे, "रात दे... या थाने चल, केस क्वेश्चन।" पुलिस की धमकी साफ। लेकिन चूत गीली। "घर छोड़ दो।"
बाइक पर राइड – स्पर्श और किस की शुरुआत
बाहर बाइक पर पीछे। शराब नशे में तेज। "सविता, तेरी गांड सटी... उफ्फ!" हाथ कमर पर। विरोध, लेकिन जलन चूत में। घर से पहले रुकवाया – सुनसान गली। उतरी तो पकड़! "विक्रम, छोड़ो!" खींचा, होंठ होंठों पर। जबरदस्त किस – जीभ अंदर, चूसते। मैं धक्का दिया, लेकिन बॉडी लाचार। "नहीं... लेकिन..." वो बोला, "चुप! तेरी चुदाई आज।" कमर पकड़, दीवार से सटा। साड़ी ऊपर, हाथ चूत पर – गीली पैंटी। "देख, कितना पानी!" उंगली अंदर – आह! ओर्गास्म आने को।
पार्टी की रात: एक कामुक देसी चुदाई कहानी
"विक्रम... घर चलो। अमित आएगा तो..." वो हंसा, "धमकी याद? थाने ले जाऊंगा, वहां चोदूंगा सबके सामने।" डर और उत्तेजना। मैं हां कह गई। बाइक स्टार्ट, घर पहुंचे। अंदर घुसते ही दरवाजा बंद। "साड़ी उतार!" ऑर्डर। कांपते हाथों से उतारी। नंगी – बड़े चुचे बाहर, निप्पल्स सख्त। वो यूनिफॉर्म उतारा – लंड 8 इंच का, मोटा, खड़ा। "चूस!" घुटनों पर। मुँह में लिया – चूसती, चाटती। वो सिर पकड़, गले तक। "अच्छी भाभी!"
जबरदस्ती चुदाई – सोफे पर डॉगी स्टाइल
उठाया, सोफे पर। चुचे दबाए, चूसे – दांत लगाए। "आह विक्रम!" गांड थप्पड़ – लाल। "झुक!" डॉगी। मोटी गांड ऊपर, चूत खुली। लंड टिप पर रगड़ा। "डालो ना!" मैं बोली, हार मान ली। एक धक्का – पूरा अंदर! "उफ्फ... चोदो!" जोर-जोर से ठोकता। चुदाई की आवाजें – प्लुक प्लुक। हाथ चुचों पर मसलता। "तेरी चूत कितनी टाइट!" मैं चिल्लाई, "हां... जोर से!" ओर्गास्म आया – चूत सिकुड़ी, पानी छूटा। वो नहीं रुका, स्पीड बढ़ाई। "अंदर डालूंगा!" "हां... भरो!" गर्म वीर्य – भर दिया।
बेडरूम में सेकंड राउंड – राइडिंग और एनल टच
सांसें तेज। बेडरूम ले गया। लेटाया, ऊपर चढ़ी। राइडिंग पोजिशन – लंड अंदर, उछलती। चुचे उछलते, वो चूसता। "भाभी, तू क्वीन है!" मैं तेज, चूत रगड़ती। फिर पलटा, मिशनरी। पैर कंधे पर, गहराई। "फट जाएगी चूत!" आहें। आखिर में गांड पर उंगली – "एनल भी?" डर, लेकिन उत्तेजना। "हल्के से..." उंगली अंदर, चोदता रहा। दूसरा झड़ना – चूत भरी।
सुबह की यादें – गिल्टी प्लेजर
सुबह अमित आने से पहले चला गया। "फिर आऊंगा, सविता। तेरी चुदाई एडिक्टिंग।" मैं नहाई, लेकिन चूत दर्द और खुशी। हिंदी सेक्स स्टोरी खत्म, लेकिन असल जिंदगी में जारी। क्या करूं? धमकी तो है, लेकिन मजा भी।
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