मामी सेक्स स्टोरी: लॉकडाउन में मामी की हार्ड चुदाई का जंगली दृश्य - हिंदी एडल्ट इमेज
11, Oct 2025
मामी सेक्स स्टोरी: लॉकडाउन में मामी की कड़ी चुदाई का जंगली राज़ (1,064 views)
फ्रेंड्स, अगर आप मामी सेक्स स्टोरी में हार्ड सेक्स के दीवाने हैं, तो ये रगड़ती-फाड़ती कहानी आपके लंड को कसकर थाम लेगी। ये मेरी ज़िंदगी का वो कच्चा, कड़ा सच है, जो आज भी मेरी रगों में आग लगाता है। मैं विक्रम हूँ, 29 साल का तगड़ा मर्द, बैंगलोर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर। लेकिन कोविड के लॉकडाउन ने सब लॉक कर दिया। मैं घर पहुँचा – राजस्थान के पुराने शहर में, जहाँ सिर्फ तीन थे: मैं, मेरे पापा सुरेश और माँ कमला। वर्क फ्रॉम होम चल रहा था, लेकिन एक शाम माँ को तेज़ बुखार चढ़ आया। डॉक्टर ने बेड रेस्ट बोला। तभी मेरी मामी रानी, पापा की छोटी बहन की बीवी (मेरे मामाजी की पत्नी), जो नज़दीक के कस्बे से हैं, केयर लेने आ गईं।
मामी रानी – ओहो, क्या आग! 36 की उम्र में वो बॉडी – टाइट कमर, भारी चूचियाँ जो साड़ी में फटने को तैयार, और वो मोटी गांड जो हर कदम पर लहराकर किसी को भी हार्ड ऑन कर दे। लेकिन मैंने कभी उन पर गंदा सोचा न था... कम से कम शुरू में। मामी घर चला रही थीं – माँ की दवा, रोटियाँ, सब। लेकिन तीसरे दिन शक हुआ। पापा, 48 के मज़बूत आदमी, बार-बार मामी को कोनों में घसीटते, फुसफुसाते। स्टोर रूम में, वॉशरूम के पास। मैंने ठान लिया – कड़ाई से पता लगाऊँगा।
चौथे दिन, आफ्टरनून ब्रेक। मैं किचन की ओर – लेकिन रुक गया। मामी सब्ज़ियाँ काट रही थीं, और पापा... फायर! उनके पीछे चिपके, एक हाथ मामी की चूचियों पर कसकर पकड़, दूसरे से गांड पर जोरदार थप्पड़ मार रहे। साड़ी ऊपर सरक गई, पेटीकोट नीचे – मामी की बालों वाली चूत चमक रही। पापा का कड़ा लंड गांड पर रगड़ते हुए बोले, "रानी, तेरी गांड तो आज फाड़ दूँगा!" मामी सिसकीं, लेकिन हँसीं, "सुरेश भैया, बस... विक्रम आ जाएगा।" मैं सन्न। खिड़की से झाँका और मामी सेक्स स्टोरी का हार्ड शो शुरू हो गया।
पापा ने मामी के बाल पकड़े, ज़ोर से खींचा – सिर पीछे झुक गया। होंठों पर काटा, जीभ अंदर घुसेड़ी। मामी चीखीं, "आह्ह... दर्द... लेकिन मज़ा!" पापा ने ब्लाउज फाड़ दिया, ब्रा तोड़ी – चूचियों को कसकर निचोड़ा, निप्पल्स पर दाँत गड़ा दिए। मामी तड़पीं, "उफ्फ... भैया... हल्का!" लेकिन पापा ने साड़ी खींच ली, पेटीकोट फाड़ा। मामी नंगी – चूत गीली, बाल उलझे। पापा ने उँगलियाँ चूत में घुसाईं – दो, तीन – जोर-जोर से अंदर-बाहर। मामी की कमर हिली, "ओह्ह... फाड़ रहे हो... आग लग गई!"
मेरा लंड स्टील। कभी मामी को हार्ड कल्पना न की, लेकिन अब मन कर रहा – उनकी चूत फाड़ दूँ। पापा ने मामी को काउंटर पर पटका, टाँगें चौड़ीं – जीभ चूत पर गाड़ दी। चूस रहे, काट रहे – मामी चिल्लाईं, "आह्ह... सुरेश... जीभ अंदर... हाय!" हाथ पापा के सिर पर, चूत दबा रही। पापा की दाढ़ी चूत पर रगड़ रही। मामी का रस बह रहा, काउंटर गीला।

मामी सेक्स स्टोरी: विधवा मामी की चुदाई की प्यासी रातें
मैं बाहर, पैंट खोली – लंड पकड़, हार्ड मुठ। दो मिनट की कड़ी चाटाई से मामी पागल। बाल खींचे, "चोदो... लंड दो!" पापा ने ट्राउज़र उतारा – 7 इंच का मोटा रॉड, नसें फूलीं। मामी ने मुँह खोला – पापा ने बाल पकड़, गले तक ठोंका। मामी गैग कर रही, आँसू, लेकिन चूस रही – लार टपक रही। पापा गरजे, "चूस रंडी... तेरी चूसाई तो कमाल!" मामी की गला फूला।
फिर मामी उभरीं, "अंदर... फाड़ दो चूत!" पापा ने उल्टा किया, काउंटर पर झुकाया – गांड ऊपर। थप्पड़ मार-मार गांड लाल। एक झटके में लंड चूत में गाड़ा – मामी चीखी, "आह्ह... फट गई... मोटा!" पापा हार्ड पेलने लगे – धक-धक, हर ठोक पर थप्पड़। मामी की गांड लहरा रही, "चोदो भैया... ज़ोर से... दिनो बाद हार्ड चुदाई!" पापा बाल खींचे, "हाँ साली... पिछली बार तो बस रगड़ा, आज भोसड़ा बनाऊँगा!"
मैं मुठ मारते सोच रहा – मामी को कसकर चोदूँ। पापा लेटे, मामी सवार – लेकिन पापा ने कमर पकड़, नीचे से ऊपर ठोका। मामी उछल रही, चूचियाँ लटक रही – पापा पकड़, निचोड़। "ले... रंडी... तेरी चूत का माल निकालूँ!" 'प्लाक-प्लाक' की कड़ी आवाज़ें। मामी चिल्लाईं, "हाँ... फाड़ो... आग बुझाओ!" फिर पापा ऊपर – मिशनरी में पटका, टाँगें कंधे पर। हार्ड धक्के – चूत फड़फड़ा रही। मामी के नाखून पीठ पर, "और कड़ा... पानी निकालो!" पापा चूचियों काटे, "तेरा दूध तो अभी भी गर्म रानी... चूसूँगा!" मामी झड़ीं – चीख के साथ चूत से फुहारा, रस छूटा। पापा दो मिनट और पेला, अंदर झाड़ा – माल भर दिया।
मैं बाहर झड़ गया, लेकिन भूख बाकी। मामी बाथरूम में। मैं पहुँचा, दरवाजे पर। नंगी मामी – पानी तले, बॉडी लाल। दरवाजा खुला! "विक्रम! क्या?" मैं बोला, "मामी... देख रहा था।" मामी घबड़ीं, "किचन... सब?" हाँ। "प्लीज़ चुप... गलती।" मैंने लंड पकड़ाया, "शर्त – हार्ड चुदाई!" मामी हिचकीं, लेकिन आँखें चमकीं।

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दरवाजा बंद, कपड़े फाड़े। नंगी मामी – चूत अभी गीली। मैं नंगा। मामी लंड पकड़ीं, सहलाईं। मैं चूचियाँ मसला, निप्पल्स कसे। "मामी... हार्ड खेलें?" होंठ काटे, जीभ अंदर। मामी सिसकीं। फर्श पर पटका, टाँगें फैलाईं – चूत पर दाँत गड़े। "आह्ह... विक्रम... काटो... ओह्ह!" रस चूसा, उँगलियाँ तीन घुसाईं – हार्ड अंदर-बाहर। मामी तड़पीं, "फाड़ रहे... चोदो!"
लंड रगड़ा, एक कड़े धक्के में गाड़ा – मामी चीखी, "उफ्फ... कड़ा तेरा... फट गई!" मैं हार्ड पेला – धक-धक, बाल खींचे, थप्पड़ मारे। मामी की चूत निचोड़ रही, "चोद भतीजा... मामी की चूत फाड़... ज़ोर!" चूचियाँ काटीं, निप्पल्स मुंह में। मामी की कमर उभरी, नाखून लगे – "हाँ... कड़ी चुदाई... पानी!" 15 मिनट की जंगली ठुकाई – 'थप्पड़-थप्पड़' गूँजी। हम झड़े – मेरा माल चूत में उफान, उनका रस लंड भिगोया।
साफ किया। मामी हाँफतीं, "राज़... लेकिन रोज़ हार्ड!" मैं हँसा, कसा चूमा। ये मामी सेक्स स्टोरी की कड़ी शुरुआत – लॉकडाउन में मामी की हार्ड चुदाई का तूफान। पसंद? अगला कड़ा पार्ट? 💥

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