हॉट सौतेली बेटी और सौतेले पिता की नशीली कहानी (1,427 views)
दिल्ली के एक रईस इलाके में, जहाँ हवाएँ भी ऐशो-आराम की बातें करती हैं, 22 साल की आकर्षक और गोरी निशा रहती थी। उसकी माँ, रीना, 39 साल की थीं, जिनकी सुंदरता ऐसी थी कि लोग उनकी उम्र का अंदाज़ा लगाने में चूक जाते। रीना के लंबे, रेशमी बाल, भरे हुए उरोज और पतली कमर किसी को भी दीवाना बना सकते थे। निशा के पिता का देहांत पाँच साल पहले हो गया था, और रीना ने दो साल पहले दूसरी शादी कर ली थी। निशा का सौतेला पिता, रवि, 43 साल का एक मज़बूत और आकर्षक पुरुष था। उसकी गहरी आवाज़, चौड़ा सीना और मर्दाना अंदाज़ किसी भी औरत का दिल चुरा सकता था। लेकिन निशा के लिए, रवि का आकर्षण एक खतरनाक और नशीला जाल बन गया।
रीना एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थीं और दिनभर स्कूल में व्यस्त रहती थीं। रवि एक सफल बिज़नेसमैन थे, जो अक्सर घर से ही काम करते। निशा, जो कॉलेज में पढ़ती थी, ने रवि की नज़रों को अपने ऊपर महसूस करना शुरू कर दिया था। उनकी आँखें उसके टाइट कपड़ों, उभरे हुए कर्व्स और गोरी त्वचा पर बार-बार ठहरती थीं। पहले तो निशा को ये अजीब लगता, लेकिन धीरे-धीरे उनकी भूखी नज़रें उसे उत्तेजित करने लगीं। उसने जानबूझकर और भी टाइट और खुली ड्रेस पहननी शुरू की, कभी-कभी झुककर अपनी गहरी क्लीवेज दिखाती।
एक गर्मी भरी दोपहर, जब रीना स्कूल गई थीं, निशा ने एक पतला सा स्लीवलेस टॉप और टाइट शॉर्ट्स पहने, जो उसके कर्व्स को और उभार रहे थे। रवि ड्राइंग रूम में बैठे अपने लैपटॉप पर काम कर रहे थे। निशा बार-बार उनके सामने से गुज़री, कभी कॉफी लेने, कभी किताब उठाने के बहाने। रवि की नज़रें उसकी नंगी जाँघों और उभरे हुए चूतड़ों पर टिक गईं। “क्या बात है, निशा? आज कुछ ज़्यादा ही बेचैन लग रही हो,” रवि ने अपनी गहरी, मादक आवाज़ में कहा, उनकी आँखों में शरारत चमक रही थी।
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निशा ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “गर्मी इतनी है, रवि जी, कि मन बेकाबू हो रहा है।” उसने जानबूझकर टेबल पर रखा गिलास उठाने के लिए झुका, ताकि उसके उरोज रवि के सामने और उभरें। रवि की साँसें तेज़ हो गईं। “तेरी ये आग तो मुझे भी जला रही है,” उन्होंने बेशर्मी से कहा। निशा की धड़कनें बढ़ गईं, और उसकी चूत में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी। उसने रवि की आँखों में देखा और फुसफुसाया, “तो इस आग को बुझा दो, रवि जी।”
रवि ने लैपटॉप बंद किया और निशा के करीब आए। उनकी गर्म साँसें निशा के चेहरे पर पड़ रही थीं। “तू सचमुच ये चाहती है?” उन्होंने उसकी कमर पकड़ते हुए पूछा। निशा ने जवाब देने की बजाय अपने रसीले होंठ रवि के होंठों से मिला दिए। उनका चुम्बन इतना तीव्र था कि कमरे की हवा गर्म हो उठी। निशा की जीभ रवि की जीभ से उलझी, और उसके हाथ उनकी शर्ट के नीचे उनकी मज़बूत छाती तक पहुँच गए। “रवि जी, मुझे तुम्हारा मोटा लंड चाहिए… आज मेरी चूत को चोद दो,” निशा ने बेकाबू होकर कहा।
रवि ने एक झटके में निशा का टॉप उतार दिया। उसकी लाल ब्रा में कैद उरोज उनके सामने थे। उन्होंने ब्रा को फाड़कर फेंक दिया और निशा के सख्त निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया। निशा सिसकारियाँ ले रही थी, “आह… रवि जी, मेरी चूत को छूओ… इसे और गीला कर दो।” रवि ने उसकी शॉर्ट्स और पैंटी को एक साथ नीचे सरकाया, और निशा की चिकनी, टपकती चूत उनके सामने थी। उनकी उंगलियाँ उसकी चूत पर फिसलने लगीं, और निशा का रस उनके हाथों पर चिपक गया। “तेरी चूत तो पहले से ही लबालब है,” रवि ने कहा और अपनी जीभ निशा की चूत के दाने पर फिराने लगे।
निशा चीख पड़ी, “आह… चाटो इसे… और ज़ोर से!” रवि की जीभ उसकी चूत की गहराइयों में थी, और उसका शरीर हर चाट पर काँप रहा था। निशा ने उनके बाल पकड़ लिए और उन्हें और गहराई में दबाया। रवि ने अपनी एक उंगली निशा की टाइट गांड में डाल दी। “रवि जी… मेरी गांड भी चोद दो!” निशा ने सिसकारते हुए कहा। रवि ने अपनी जीन्स उतारी, और उनका तना हुआ, मोटा लंड निशा के सामने था। निशा ने उसे अपने हाथ में लिया और उसके टोपे को चाटने लगी। रवि की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं, “तेरा मुँह तो जन्नत से कम नहीं।”
निशा ने रवि को सोफे पर धकेला और उनकी गोद में बैठ गई। उसने उनके लंड को अपनी चूत पर रगड़ा और धीरे-धीरे उसे अंदर लिया। “आह… रवि जी, तेरा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है,” निशा कराहते हुए बोली। रवि ने उसके चूतड़ पकड़ लिए और उसे ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे करने लगे। हर धक्के के साथ निशा की चूत उनके लंड को निगल रही थी, और उसके उरोज हवा में उछल रहे थे। रवि ने उसके निप्पल को अपने दाँतों से हल्के से काटा, और निशा चीख पड़ी, “और ज़ोर से… मेरी चूत को रगड़ दो!”
रवि ने निशा को पलटकर डॉगी स्टाइल में लिटाया। उसकी सेक्सी गांड उनके सामने थी। उन्होंने उस पर एक चपत मारी और कहा, “तेरी ये गांड… इसे भी चोदना है।” निशा ने हँसते हुए जवाब दिया, “तो चोद ना… मेरी गांड तेरे लिए है।” रवि ने अपनी उंगलियाँ निशा की चूत के रस से गीली कीं और उसकी टाइट गांड में डालीं। निशा सिसकारी, लेकिन अपनी गांड को और पीछे धकेला। रवि ने अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेला। “आह… तेरा लंड मेरी गांड को चीर रहा है!” निशा चीखी, लेकिन उस दर्द में एक अनोखा सुख था।
रवि की रफ्तार बढ़ी, और उनका लंड निशा की गांड में अंदर-बाहर होने लगा। निशा की चूत से रस टपक रहा था, और उसके चूतड़ रवि की जांघों से टकरा रहे थे। रवि ने उसे फिर से पलटाया और उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। उनका लंड निशा की चूत में फिर से घुसा, और वो उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। “तेरी चूत इतनी टाइट है… मैं झड़ने वाला हूँ,” रवि ने कराहते हुए कहा। निशा ने अपनी चूत को और सिकोड़ा और बोली, “मेरे अंदर झड़… मुझे तेरा गर्म रस चाहिए!”
उनके धक्के अब और तेज़ हो गए। निशा की चूत और गांड दोनों रवि के लंड से रगड़ खा चुकी थीं। आख़िरकार, रवि ने एक ज़ोरदार धक्का मारा, और उनका गर्म रस निशा की चूत में भर गया। निशा भी उसी पल झड़ गई, और उसकी चूत का रस रवि के लंड पर बहने लगा। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे की बाहों में गिर पड़े। उनकी देहें पसीने और रस से चिपचिपी थीं। निशा ने रवि की छाती पर सिर रखा और हल्के से हँसी, “रवि जी, तुमने मेरी चूत को तो बुझा दिया, लेकिन मेरी आग और भड़क गई।”
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उस दिन के बाद, निशा और रवि का रिश्ता एक नया रंग ले चुका था। जब भी रीना घर पर नहीं होती थीं, रवि की नज़रें निशा को ढूंढने लगती थीं। उनकी मज़बूत बाहें और मोटा लंड निशा के लिए एक नशा बन गया था। एक बार रीना के स्कूल से लौटने से पहले, रवि ने निशा को किचन में पकड़ लिया। “तेरी चूत की गर्मी रीना से कहीं ज़्यादा है,” उन्होंने फुसफुसाया और उसे काउंटर पर झुकाकर फिर से चोदना शुरू कर दिया। निशा की सिसकारियाँ किचन में गूँज रही थीं।
उनकी चुदाई अब एक रूटीन बन गई थी। कभी बाथरूम में, कभी लिविंग रूम में, कभी निशा के बेडरूम में, रवि की चुदाई निशा की चूत और गांड को रगड़ देती थी। एक बार देर रात, जब रीना गहरी नींद में थीं, रवि निशा के कमरे में आए और उसे चोदने लगे। “तेरी माँ को नहीं, तुझे चोदने में मज़ा आता है,” उन्होंने निशा की चूत में लंड डालते हुए कहा। निशा ने उनकी कमर पकड़ ली और उन्हें और गहराई में खींचा।
इस गुप्त रिश्ते ने निशा और रवि के बीच एक ऐसी आग जला दी थी, जो बुझने का नाम नहीं ले रही थी। रीना को कभी शक नहीं हुआ, क्योंकि रवि उनके सामने एकदम सामान्य रहते थे। लेकिन निशा के लिए, उनकी हर नज़र, हर स्पर्श एक जुनून था। उसकी चूत और गांड अब रवि के लंड की आदी हो चुकी थीं। हर रात, जब निशा बिस्तर पर लेटती, रवि की चुदाई की यादें उसे फिर से गीला कर देती थीं। यह नशीला रिश्ता उनके बीच का एक अनकहा राज़ बन गया, जो हर मौके पर उनकी साँसों को गर्म कर देता था।
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