मामी चिंता की चुदाई: एक हॉट सेक्स कहानी (1,031 views)
मेरा नाम गुद्दू है, और मैं 22 साल का एक सुगठित शरीर वाला जवान लड़का हूँ। मेरी मामी, चिंता, 32 साल की हैं, लेकिन उनकी गोरी चमड़ी, भरे हुए चूचे, और गदराई गांड देखकर कोई भी लंड खड़ा हो जाए। मामी का फिगर 36-28-38 है, और उनकी आँखों में हमेशा एक कामुक चमक रहती है। मामा एक सरकारी नौकरी में हैं और अक्सर घर से बाहर रहते हैं, जिसके कारण मामी की चूत की प्यास बुझ नहीं पाती।
पिछले महीने मैं मामा के घर कुछ दिन रहने गया। मामा उस समय बाहर गए थे, और घर में सिर्फ मैं और मामी चिंता थे। पहले दिन से ही मामी मुझे कामुक नजरों से देख रही थी। उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार सरक जाता, और उनके गहरे गले के ब्लाउज से उनके चूचे बाहर झांकते। मैं समझ गया कि मामी की चूत में आग लगी है।
एक सुबह मैं नहाने गया। बाथरूम में मैंने अपने कपड़े उतारे और शॉवर चालू किया। अचानक दरवाजा खुला, और मामी चिंता तौलिया लेकर अंदर आ गई। उनकी आँखें मेरे 7 इंच के खड़े लंड पर टिक गईं। "अरे गुद्दू, तौलिया भूल गए?" उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उनकी नजर मेरे लंड से हट नहीं रही थी।
"मामी, आप भी तो बिना बताए अंदर आ गईं," मैंने हंसते हुए कहा।
"क्या करूँ, गुद्दू? तेरा मामा तो घर पर होता नहीं, और मेरी प्यास बुझाने वाला कोई है नहीं," मामी ने कामुक अंदाज में कहा और मेरे करीब आ गईं। उनकी साड़ी भीग चुकी थी, और उनके चूचे ब्लाउज में से साफ दिख रहे थे।
मैंने मौका देखकर मामी की कमर पकड़ ली और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। "मामी, आपकी ये प्यास मैं बुझा सकता हूँ," मैंने उनके कान में फुसफुसाया।
"हाय राम, गुद्दू, ये गलत है... लेकिन मुझे भी तो चाहिए," मामी ने शरमाते हुए कहा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
मामी ने मुझे बाथरूम से बाहर खींचा और बेडरूम में ले गईं। वहाँ उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी। उनका गोरा बदन, गोल चूचे, और गीली चूत देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने मामी को बिस्तर पर लिटाया और उनके चूचों को जोर-जोर से दबाने लगा।
"आह्ह... गुद्दू, और जोर से... मेरे चूचे मसल दे," मामी सिसकारियाँ ले रही थी। मैंने उनके निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। मामी की सिसकारियाँ और तेज हो गईं। "हाय... गुद्दू, मेरी चूत में आग लगी है... जल्दी से चोद दे मुझे!"
मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। मामी की चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड हर धक्के में और सख्त हो रहा था। "मामी, आपकी चूत तो जन्नत है!" मैंने कहा और उनकी गांड को थपथपाते हुए और तेजी से चोदने लगा।
कुछ देर चूत चोदने के बाद मामी ने कहा, "गुद्दू, अब मेरी गांड मार... मैंने कभी गांड नहीं मरवाई, लेकिन तेरे लंड के लिए मैं सब कुछ करूँगी।" मैंने उनकी गांड को चाटा और अपनी उंगली से उसे ढीला किया। फिर मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और धीरे-धीरे उनकी गांड में डाल दिया।
"आह्ह... गुद्दू, दर्द हो रहा है... लेकिन रुकना मत!" मामी ने कहा। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और कुछ ही देर में मामी को भी मजा आने लगा। "हाँ... गुद्दू, और जोर से... फाड़ दे मेरी गांड!" मामी चिल्ला रही थी।
लगभग 20 मिनट तक मैंने मामी की चूत और गांड मारी। आखिरकार, मैंने अपना माल उनकी चूत में छोड़ दिया। मामी की चूत मेरे माल से भर गई, और वे तृप्त होकर मेरे सीने पर लेट गईं। "गुद्दू, तूने मेरी सारी प्यास बुझा दी... अब तू जब भी आएगा, मेरी चूत और गांड तेरे लिए तैयार रहेंगी," मामी ने कहा।
उस दिन के बाद, जब भी मामा घर से बाहर होते, मैं और मामी चिंता चुदाई का खुल्लम-खुल्ला खेल खेलते। मामी की प्यासी चूत और उनकी गदराई गांड ने मुझे उनका दीवाना बना दिया। अगर आपको यह मामी भांजा सेक्स स्टोरी पसंद आई, तो अपने विचार कमेंट में जरूर बताएँ।
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