सुबह की चुदाई का नशा: सेक्सी हिंदी स्टोरी (1,350 views)
हाय दोस्तों, मैं रिया शर्मा, एक बार फिर अपनी चटपटी और कामुक कहानी लेकर आपके सामने हाज़िर हूँ। इस बार मैं आपको बताने जा रही हूँ कि कैसे मैंने अपनी नासमझी में एक डिलीवरी ब्वॉय के साथ सुबह-सुबह चुदाई का मज़ा लिया और कैसे उसने मेरे जिस्म को भोगा।
मेरे घर में मैं और मेरा पति विक्रम अकेले रहते हैं। मेरा नौ साल का बेटा हॉस्टल में है। हर शनिवार की रात हम बाहर डिनर करते हैं, फिर घर आकर कोई हॉट मूवी या पॉर्न देखते हैं और देर रात तक चुदाई के मज़े लेते हैं। विक्रम को रंडीपन वाली बातें बहुत भाती हैं, और मुझे भी उसकी बाहों में नाचना अच्छा लगता है।
कल रात, यानी शनिवार को, विक्रम ने मुझे बिस्तर पर ऐसा चोदा कि मेरा जिस्म थककर चूर हो गया। उसने मेरी चूत और गांड दोनों को रगड़-रगड़ कर लाल कर दिया। सुबह मैं देर तक सोती रही क्योंकि मेरा बदन दर्द कर रहा था। आमतौर पर मैं सात बजे उठकर नाश्ता बनाती हूँ, लेकिन आज मूड नहीं था। मैंने सोचा, क्यों न बाहर से कुछ मंगवा लूँ? बस, फोन उठाया और डोसा, इडली, और कॉफी का ऑर्डर कर दिया। ऑर्डर करके मैं फिर से नींद की आगोश में चली गई।
अचानक डोरबेल की आवाज़ ने मुझे जगा दिया। पहले तो मैंने इग्नोर किया, लेकिन बार-बार बेल बजने लगी। मुझे याद आया कि शायद नाश्ता आ गया होगा। मैं बिस्तर से उठी, लेकिन उस वक्त मेरे जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था। पास ही एक सिल्क का गाउन पड़ा था, जो बेहद पतला और छोटा था। मैंने उसे जल्दी से लपेट लिया, लेकिन उसका बेल्ट गायब था। मैंने बाएं हाथ से गाउन को कसकर पकड़ा और दरवाज़ा खोलने चल पड़ी। गाउन इतना टाइट था कि मेरे मम्मों का उभार साफ दिख रहा था, और नीचे से मेरी जांघें और चूत का हल्का सा हिस्सा झलक रहा था। उस जल्दबाज़ी में भी मुझे अपने जिस्म की नुमाइश का मज़ा आने लगा।

दरवाज़ा खोला तो सामने एक जवान डिलीवरी ब्वॉय खड़ा था, शायद 25-26 साल का। मेरी सेक्सी शक्ल और उभरे हुए मम्मों को देखकर उसकी आँखें चमक उठीं। मैंने उसकी तरफ बिना ध्यान दिए एक हाथ से नाश्ते का पैकेट लिया और दरवाज़ा बंद करने लगी। तभी उसने कहा, "मैडम, ज़रा रुकिए!"
मैंने चौंककर पूछा, "क्या है? पेमेंट तो ऑनलाइन हो गया है।"
वह हंसते हुए बोला, "नहीं मैडम, पेमेंट की बात नहीं। हमारी कंपनी का आज सालगिरह है, तो हर कस्टमर को फ्री चॉकलेट केक दे रहे हैं।"
मैंने कहा, "अच्छा, ठीक है, दे दो।" मैंने नाश्ते का पैकेट साइड टेबल पर रखा और केक लेने वापस मुड़ी। लेकिन तभी देखा कि वह लड़का मेरे पीछे-पीछे अंदर आ गया था। मैंने फिर से गाउन को कसकर पकड़ा और बाएं हाथ से केक ले लिया।
उसने एक राइटिंग पैड निकाला और बोला, "मैडम, बस इस फॉर्म पर फीडबैक देना है।"
मैंने सोचा, मुफ्त का केक दे रहे हैं, तो फीडबैक तो मांगेंगे ही। मैंने केक टेबल पर रखा और पैड पढ़ने लगी। तभी वह मेरे सामने पेन लेकर आया। मैंने बिना सोचे गाउन से हाथ हटा दिया और पेन ले लिया। अचानक मुझे एहसास हुआ कि गाउन खुल गया है और मैं उसके सामने पूरी नंगी खड़ी हूँ। मेरे गोरे, चिकने जिस्म और चिकनी चूत को देखकर उसकी आँखें चमक उठीं। वह बोला, "वाह मैडम, क्या माल हो तुम! ये चूत तो जैसे रसीली गुलाब जामुन है!"
मैं उसकी बात सुनकर शरमा गई, लेकिन मेरे जिस्म में एक अजीब सी गर्मी दौड़ने लगी। मैंने जल्दी से मुड़कर पैड और पेन टेबल पर रखने के लिए झुकी, लेकिन इससे मेरी नंगी गांड उसके सामने आ गई। वह तुरंत मेरे पीछे चिपक गया। उसने मेरी गांड को अपनी जांघों से दबाया और दोनों हाथों से मेरे मम्मों को ज़ोर से मरोड़ दिया। मेरे मुँह से एक तेज़ "आह्ह" निकल गई।
मैंने उसे डांटने की बजाय धीरे से कहा, "अरे, धीरे कर… मेरा पति अंदर सो रहा है, जग जाएगा!"
यह सुनकर वह और जोश में आ गया। उसने मेरा गाउन पूरा खींचकर उतार दिया और मुझे पलटकर अपनी बाहों में ले लिया। मेरे कूल्हों को पकड़कर उसने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसका मुँह गुटखे की महक से भरा था, लेकिन उसकी गर्मी मुझे मदहोश कर रही थी। वह मेरे कूल्हों को दबोचते हुए मुझे चूमने लगा, फिर धीरे-धीरे नीचे आया और मेरे मम्मों को चूसने लगा। एक मम्मा मुँह में लेता, तो दूसरे को हाथों से मसलता। मेरी चूत में पानी बहने लगा।
वह और नीचे गया और मेरी चिकनी चूत को चाटने लगा। अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर-बाहर करने लगा। मैंने उसके सिर को अपनी चूत पर दबा लिया और मज़े में सिसकारियाँ लेने लगी। फिर मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। सामने उसका लंबा, मोटा, काला लंड उछल रहा था। उसने मेरा सिर पकड़कर मुझे झुकाया और अपना लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया। मैं भी जोश में आकर उसका लंड चूसने लगी, जैसे कोई लॉलीपॉप हो।
मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसका लंड अपनी चूत की तरफ खींचा। लेकिन उसने मुझे सोफे पर खींच लिया और अपनी गोद में बिठा लिया। मेरी चूत पहले से ही गीली थी, तो उसका लंड आसानी से अंदर चला गया। मैं उसके लंड पर उछलने लगी। सोफे पर धकाधक चुदाई शुरू हो गई। मेरी सिसकारियाँ तेज़ होने लगीं और वह भी "आह… उह…" की आवाज़ें निकालते हुए मुझे चोद रहा था।
फिर उसने मुझे उठाया, सोफे पर पटका और मेरे ऊपर चढ़ गया। मेरे मम्मों को मसलते हुए वह मुझे तेज़ी से चोदने लगा। मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, लेकिन उसका लंड अभी भी तना हुआ था। उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया। मैं चिल्लाने वाली थी, लेकिन पति के जगने के डर से मैंने मुँह पर हाथ रख लिया। वह मेरी गांड को धकाधक चोदने लगा, साथ ही मेरे मम्मों को मसल रहा था।
आखिर में उसने अपना सारा माल मेरी गांड, चूत, और पीठ पर उड़ेल दिया। फिर बोला, "साली, तूने मेरा लंड गंदा कर दिया, चल अब चूसकर साफ कर!" मैंने भी मज़े लेते हुए उसका लंड चाटकर साफ किया। उसने अपने कपड़े पहने, मुझे एक चुम्मी दी और चला गया।
मैं नहाने के लिए बाथरूम की ओर बढ़ गई, लेकिन मेरे जिस्म में अभी भी उस सुबह की चुदाई का नशा चढ़ा हुआ था।
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